स्वयं पर नियंत्रण करने की मनोवैज्ञानिक तकनीक

                                            प्रस्तावना- मानव जीवन का सबसे कठिन युद्ध किसी बाहरी दुश्मन से नहीं बल्कि अपने भीतर चलने वाले विचारों, भावनाओं और इच्छाओं से होता है। स्वयं पर नियंत्रण (Self Control) वह आधार है जिस पर सफलता, संतुलन, आत्मविश्वास और खुशहाली की पूरी इमारत खड़ी रहती है। वैज्ञानिक अनुसंधान बताते हैं कि आत्म-नियंत्रण जन्मजात क्षमता नहीं है, बल्कि एक कौशल है जिसे सीखा और विकसित किया जा सकता है। यह लेख हमें मनोविज्ञान की सिद्ध तकनीकों के माध्यम से बताता है कि- हम अपने विचारों, भावनाओं, आदतों, निर्णयों और प्रतिक्रियाओं पर पूर्ण नियंत्रण कैसे पा सकते हैं। 1 स्वयं पर नियंत्रण क्या है?  स्वयं पर नियंत्रण का अर्थ है- सही समय पर सही निर्णय लेना। आवेगों पर रोक लगाना। भावनाओं को दिशा देना। व्यवहार को लक्ष्य के अनुरूप बनाना। और बाहरी परिस्थितियों के बावजूद आंतरिक स्थिरता बनाए रखना। मनोविज्ञान में इसे Self Regulation , Impulse Control और Executive Func...

राजस्थान रा लोक देवता श्री देवनारायण (अपडेट 2026)

            

लोक देवता श्री देव नारायण भगवान


राजस्थान संता अर सूरवीरां री धरती मानीजै। ई धरती माथै केई संत अर सुरवीर हुया जै जन माणस री भळाई सारू घणों पूठरौ काम करया इणमें अेक नांव राजस्थान रा लोकचावा लोकदेवता देवनारायण रौ है। वारौ जलम वि.सं. ९६८  माघ शुक्ला सप्तमी वार थावर मांय मालासेरी गांव में हुयौ। वारै पिता बगड़ावत सवाई भोज अर माता रौ नांव साढू गुर्जरी हौ जकौ खटाणा गौत्र री बताई जावै। वांरी घरहाळी रौ नांव पीपलदे हौ जौ माळवा रै धार नरेश री राजकुमारी ही वारै टाबर रौ नांव बीला नै टाबरी रौ नांव बीली बताई जावै। भगवान देवनारायण जी रौ सरूप शासक अर सूर रूप में रैयौ। वारौ व्यक्तित्व भगती अर सगती रौ संगम है। इणी`ज कारण वारै हाथ में भळहळतो भाळो अर तलवार है। देवनारायण जी समाज विरोधी ताकतां रौ नास करण सारू कैई अत्याचारी राजावां सूं युद्ध करया आपरी भगती सूं कैई सिद्धियां प्राप्त करी वै आपरै इण करामातां सूं देवरूप बणग्या अर लोक समाज नै त्राण दिरावण री महताऊ भूमिका रो निभाव करयौ। वै छुआछूत अर ऊँच नीच रा घणा विरोधी हा। अर आपरै सागै उण समय अछूत समझी जाणै वाळी जातियाँ रा मोट्यारां नै राखतां थका ऐलान करया कै देवनारायण रा मन्दिरां मांय यै लोग ही सेवा पूजा करैला।आ घटनावां सूँ पतो लागै कै देवनारायण जी साधारण घर परिवार मांय पैदा होवण वाळा अर आपरा लोकसेवी अचरज भरिया कामां सूं असाधारण व्यक्तित्व रा धणी बण जावण वाळा लोकनायक हा। वानै आयुर्वेद रौ घणों मोटौ ज्ञान हौ जकौ दीन दुखियां रौ देशी जड़ी बुटियाँ सूं ईलाज करता। गुर्जर जाति वानै आपरी श्रद्धा सूँ भगवान विष्णु रौ अवतार,लीला घोड़ा रा असवार, उद्दल, देव महाराज, देवधणी, देवजी, इग्यारह कला रा अवतार,साढू रा लाल इत्यादि कैई नामां सूं पुकारै है।

कृष्ण री तरह देवनारायण भी गायां रा रखवाळा हा, वारै कनै ९८000 गायें ही । जद देवनारायण री गायां राण भिणाय रौ राणा घेऱ ले लग्यां, तौ देवनारायण गायां री रखवाळी खातर राणा सूं युद्ध कर्या अर गायां नै छुड़ावण ल्याया। देवनारायण रै सागै १४४४ ग्वाळां रौ बळ बतायौ गयौ है, जिणरौ काम गायां नै चरावण अर गायां री रखवाळी करणियौ हौ। देवनारायण नै आपणां अनुयायां नै गायां री रखवाळी रौ संदेसो दियौ।

           राजस्थान मांय इणकै अनुयायीयां  नै अलग-अलग ठिकाणा पर देवालय बणवाया है, जिणकौ देवरा भी कहवै है। यै देवरा अजमेर, चित्तौड़, भीलवाड़ा, अर टोंक मांय घणी मात्रा मांय है। देवनारायण रौ प्रमुख मंदिर भीलवाड़ा जिले मांय आसीन्द कस्बे रै नजदीक खारी नदी रै किनारा माथै महाराजा सवाई भोज रौ मिन्दर  है। देवनारायण रौ एक प्रमुख देवालय निवाई तहसील रा जोधपुरिया गांव मांय मांसी नदी रै तट माथै  है जिण पर घणा जातरू आपरी मन्नत लेर माथौ टैकने आवै है।    

आयुर्वेद अर लोकसेवा मांय योगदान

देवनारायण भगवान नै आयुर्वेद रौ घणौ गहरौ ज्ञान हौ। वांणै दीन-दुखियां रौ देशी जड़ी-बूटियां सूं इलाज करता। लोकमान्यता अनुसार वांणै अनेक चमत्कार कर लोकां रौ दुख दूर करयौ। इणी कारण लोक समाज वाणै भगवान विष्णु रौ अवतार मानै है।

गुर्जर समाज वाणैअलग-अलग नामां सूं याद करै है जिण में प्रमुख नाम है –

  • देवधणी
  • देवजी
  • उद्दल
  • लीला घोड़ा रा असवार
  • साढू रा लाल
  • इग्यारह कला रा अवतार

देवनारायण जी रौ संदेश

देवनारायण भगवान रो जीवन समाज सेवा, समानता, गौरक्षा, धर्म रक्षा अर मानव कल्याण रौ प्रतीक है। वांरो जीवन आज भी लोक समाज नै सत्य, साहस अर सेवा री प्रेरणा देवै है।

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लेखक-  डॉ (मानद) बद्री लाल गुर्जर

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