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अंतर्दर्शन के अभाव में जीवन की समस्याएँ क्यों बढ़ती हैं

प्रस्तावना जीवन एक यात्रा है सुख-दुःख, आशा-निराशा, सफलता-विफलता और अनुभवों की। इस यात्रा में हर व्यक्ति कुछ न कुछ खोजता है कोई धन, कोई सम्मान, कोई प्रेम, कोई शांति। परंतु बहुत कम लोग यह खोजते हैं कि मैं वास्तव में कौन हूँ? मनुष्य का जीवन बाहरी उपलब्धियों से नहीं बल्कि भीतर की स्पष्टता से शांत होता है। जब व्यक्ति अपने भीतर झाँकना बंद कर देता है जब वह स्वयं से संवाद करना भूल जाता है तब उसके जीवन में समस्याएँ बढ़ने लगती हैं- तनाव, भ्रम, असंतोष, संबंधों में दूरी, निर्णयहीनता, और अंततः आत्मविस्मृति। यह सब एक ही कारण से होता है-  अंतर्दर्शन का अभाव ।  अंतर्दर्शन का अर्थ है स्वयं के भीतर झाँकना, अपने विचारों, भावनाओं, उद्देश्यों और कर्मों का आत्म-परीक्षण करना। यह आत्मा का दर्पण है जो हमें यह दिखाता है कि हम वास्तव में कौन हैं हम क्यों सोचते हैं जैसा हम सोचते हैं और हम किस दिशा में जा रहे हैं।  अंतर्दर्शन का वास्तविक अर्थ अंतर्दर्शन कोई दार्शनिक शब्द नहीं यह जीवन की सबसे व्यावहारिक साधना है। यह आत्म-जागरूकता की वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपने भीतर के प्रवाह को महसूस करता...

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