आध्यात्मिक यात्रा प्रस्तावना- मानव जीवन केवल शरीर की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है। हम केवल खाने सोने और जीने के लिए नहीं जन्मे हैं। हमारे भीतर एक ऐसी चेतना है जो इस भौतिक संसार से परे किसी उच्च शक्ति की खोज में निरंतर गतिमान रहती है। यही खोज आध्यात्मिक यात्रा कहलाती है। यह यात्रा किसी सड़क या गंतव्य की नहीं बल्कि आत्मा की गहराइयों में उतरने की होती है। जब व्यक्ति बाहरी दुनिया के कोलाहल से थककर भीतर की ओर मुड़ता है तब वह आत्मिक मार्ग पर चल पड़ता है। यह मार्ग कठिन भी है और मधुर भी क्योंकि इसमें सत्य से साक्षात्कार होता है। 1 आध्यात्मिक यात्रा क्या है? आध्यात्मिक यात्रा वह आंतरिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपनी आत्मा के मूल स्वरूप को पहचानने का प्रयास करता है। यह कोई धार्मिक या पंथनिष्ठ यात्रा नहीं होती यह तो एक चेतन अनुभव है। इसमें व्यक्ति स्वयं से प्रश्न करता है- मैं कौन हूँ? मैं यहाँ क्यों हूँ? जीवन का उद्देश्य क्या है? जब इन प्रश्नों के उत्तर भीतर से मिलने लगते हैं तो यही यात्रा एक अद्भुत अनुभव बन जाती है। 2 बाहरी से भीतरी संसार की ओर प्रत्येक मनुष्य की शुरुआत बाहरी...
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