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क्यों हम खुद से दूर होते जाते हैं- एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

भूमिका- आज के समय में हम तकनीकी रूप से जुड़े हुए हैं लेकिन भावनात्मक रूप से अकेले। काम, सोशल मीडिया, संबंधों का दबाव, दौड़ती-भागती जिंदगी, तनाव, अपूर्ण इच्छाएँ और लगातार तुलना ने हमें खुद से ही काट दिया है। बहुत से लोग कहते हैं- दिल खाली-खाली लगता है। मन में क्या चल रहा है खुद नहीं जानता। मैं पहले जैसा नहीं रहा। मेरे अंदर एक अलग व्यक्ति बैठा है जिसे मैं समझ नहीं पाता। इसे मनोविज्ञान में  आत्म-वियोग कहा जाता है। यह लेख इसी जटिल प्रक्रिया का गहन विश्लेषण करता है। 1 आत्म-वियोग क्या है? आत्म-वियोग तब होता है जब व्यक्ति- अपनी भावनाओं को महसूस नहीं कर पाता अपने विचारों को पहचान नहीं पाता अपनी इच्छाओं पर ध्यान नहीं दे पाता अपने व्यक्तित्व से दूर हो जाता है अपनी पहचान को लेकर भ्रमित हो जाता है यह ऐसा अनुभव है जैसे आप अपने ही जीवन में दर्शक बन गए हों। आत्म-वियोग की प्रमुख विशेषताएँ- भावनात्मक सुन्नता मन में खालीपन अपनी जरूरतों के प्रति अनभिज्ञता निर्णय लेने में कठिनाई जीवन में उद्देश्यहीनता लगातार असंतोष तनाव एक सामान्य स्थिति बन जाना मन की यह दूरी धीरे-धीरे बनती है और व्यक...

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