प्रस्तावना मनुष्य का जीवन केवल शरीर विचार और भावनाओं का मिश्रण नहीं है इसके भीतर एक और अदृश्य सत्ता विद्यमान है आत्मा। इस आत्मा की उपस्थिति का अनुभव ही आध्यात्मिक अनुभूति कहलाता है। यह अनुभव कोई दार्शनिक कल्पना नहीं बल्कि एक जीवंत साक्षात्कार है जो व्यक्ति को सांसारिक मोह, चिंता और भय से मुक्त करता है। जब व्यक्ति यह जान लेता है कि मैं केवल शरीर नहीं बल्कि एक अनंत चेतना हूँ तब उसके भीतर एक दिव्य शांति और प्रेम का प्रस्फुटन होता है यही है आध्यात्मिक अनुभूति । 1 आध्यात्मिक अनुभूति का अर्थ आध्यात्मिक अनुभूति शब्द दो भागों से मिलकर बना है आध्यात्मिक अर्थात आत्मा से संबंधित और अनुभूति अर्थात प्रत्यक्ष अनुभव। अर्थात जब व्यक्ति अपनी आत्मा की चेतना से जुड़ता है और उस सत्य को अनुभव करता है जो उसकी भौतिक देह से परे है तो उसे आध्यात्मिक अनुभूति कहा जाता है। यह केवल ज्ञान का विषय नहीं बल्कि अनुभव की गहराई है। यह वह अवस्था है जहां व्यक्ति सोचने से नहीं महसूस करने से जानता है। 2 आध्यात्मिक अनुभूति और धर्म में अंतर धर्म नियम और संस्कारों का समूह है जबकि आध्यात्मिक अनुभूति धर्म के पीछे छि...
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