मनोवृत्तियों की पहचान- आत्म-बोध और व्यक्तित्व विकास की दिशा
1 प्रस्तावना-
2 मनोवृत्ति की परिभाषा और प्रकृति
- कोई व्यक्ति हर परिस्थिति में आशावादी दृष्टिकोण रखता है, तो उसकी मनोवृत्ति सकारात्मक है।
- वही व्यक्ति यदि हर स्थिति में नकारात्मकता ढूँढता है तो उसकी मनोवृत्ति नकारात्मक कही जाएगी।
मनोवृत्ति की प्रकृति तीन स्तरों पर कार्य करती है-
- बौद्धिक स्तर पर- विचार और तर्क की दिशा निर्धारित करती है।
- भावनात्मक स्तर पर- संवेदनाओं और सहानुभूति की गुणवत्ता तय करती है।
- व्यवहारिक स्तर पर- कर्म और आचरण में संतुलन लाती है।
3 मनोवृत्तियों का निर्माण कैसे होता है-
(क) परिवार और बाल्यकालीन अनुभव-
माता-पिता, घर का वातावरण और बचपन के अनुभव व्यक्ति की सोच को गहराई से प्रभावित करते हैं। यदि परिवार में स्नेह, अनुशासन और सहयोग का माहौल हो, तो व्यक्ति की मनोवृत्ति भी संतुलित और दयालु होती है।
(ख) शिक्षा और समाज-
शिक्षा केवल ज्ञान नहीं देती, बल्कि दृष्टिकोण भी देती है। एक अच्छा शिक्षण वातावरण व्यक्ति में सहिष्णुता, विवेक और आत्म-सम्मान का विकास करता है।
(ग) संस्कार और परंपराएँ-
(घ) अनुभव और आत्मचिंतन-
4 मनोवृत्तियों के प्रकार
मनोवृत्तियाँ व्यक्ति-व्यक्ति के अनुसार भिन्न होती हैं। इन्हें निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है:
(1) सकारात्मक मनोवृत्ति
(2) नकारात्मक मनोवृत्ति-
(3) तटस्थ मनोवृत्ति-
यह वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति हर परिस्थिति में अत्यधिक प्रतिक्रिया नहीं देता। वह वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण से सोचता है।
(4) रचनात्मक मनोवृत्ति-
ऐसी मनोवृत्तियाँ समाज और जीवन में नये विचारों, सुधारों और आविष्कारों का मार्ग खोलती हैं।
5 मनोवृत्तियों की पहचान क्यों आवश्यक है-
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स्वयं को समझने के लिए-जब हम अपनी मनोवृत्तियों को पहचानते हैं, तो अपनी वास्तविक प्रेरणाओं और भय को जान पाते हैं।
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व्यक्तित्व विकास के लिए-सकारात्मक मनोवृत्तियाँ व्यक्तित्व को आकर्षक और प्रभावशाली बनाती हैं।
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संबंधों के सुधार हेतु:जब हम दूसरों की मनोवृत्तियों को समझते हैं तो मतभेदों में सहानुभूति और संवाद का पुल बनता है।
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मानसिक शांति के लिए:जो व्यक्ति अपनी नकारात्मक प्रवृत्तियों को पहचान लेता है वह धीरे-धीरे उन्हें नियंत्रित कर लेता है।
6 मनोवृत्तियों की पहचान के उपाय-
(1) स्व-पर्यवेक्षण-
(2) ध्यान और आत्मचिंतन-
(3) डायरी लेखन-
(4) सकारात्मक संगति-
(5) आत्म-संवाद-
अपने आप से प्रश्न पूछें-
मैं ऐसा क्यों सोचता हूँ?क्या यह प्रतिक्रिया सही है?क्या मेरा निर्णय विवेकपूर्ण है?
यह संवाद धीरे-धीरे मन की गहराइयों तक पहुँचाता है।
7 मनोवृत्तियों का मूल्यांकन
मनोवृत्तियों का मूल्यांकन तीन आधारों पर किया जा सकता है-
- भावनात्मक प्रतिक्रिया- क्या मैं हर स्थिति में स्थिर रह पाता हूँ?
- विचारों की दिशा- मेरे विचार अधिक सकारात्मक हैं या नकारात्मक?
- व्यवहार का स्वरूप- क्या मेरे कार्य दूसरों के हित में हैं या केवल स्वयं तक सीमित?
इन प्रश्नों के उत्तर व्यक्ति को अपनी वास्तविक मनोवृत्ति की झलक देते हैं।
8 नकारात्मक मनोवृत्तियों से मुक्ति के उपाय
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कृतज्ञता का अभ्यास करें-हर दिन तीन ऐसी चीजें लिखें जिनके लिए आप आभारी हैं।
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क्षमा भाव विकसित करें-दूसरों की गलती को पकड़ने के बजाय उन्हें क्षमा करना आंतरिक शांति लाता है।
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सेवा और दान का अभ्यास-निःस्वार्थ सेवा से अहंकार गलता है और मनोवृत्ति निर्मल होती है।
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संतुलित जीवनशैली-सही आहार, नींद, और व्यायाम से मानसिक ऊर्जा स्थिर रहती है।
9 समाज और शिक्षा में मनोवृत्ति की भूमिका-
10 निष्कर्ष-
जिसने अपनी मनोवृत्तियों को जीत लिया उसने जीवन को जीत लिया।

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