शिक्षा व्यवस्था में अंतर्दर्शन का अभाव और उसका प्रभाव
प्रस्तावना
शिक्षा व्यवस्था में अंतर्दर्शन का अभाव आज भारतीय शिक्षा प्रणाली की एक गंभीर चुनौती बन चुका है। शिक्षा केवल परीक्षा अंक और प्रमाण पत्र तक सीमित होती जा रही है। ज्ञान का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना रह गया है जबकि शिक्षा का मूल उद्देश्य आत्म-विकास चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास होना चाहिए।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था-
शिक्षा का लक्ष्य केवल बुद्धि का विकास नहीं बल्कि हृदय की संवेदनशीलता और चरित्र की दृढ़ता भी है।
जब शिक्षा प्रणाली में आत्मचिंतन और आत्ममूल्यांकन की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है तब विद्यार्थी केवल जानकारी के भंडार बन जाते हैं लेकिन जीवन के मूल्यों से दूर हो जाते हैं।
1 अंतर्दर्शन का वास्तविक अर्थ
अंतर्दर्शन का अर्थ है- स्वयं को भीतर से देखना।
यह आत्मचिंतन की वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं, निर्णयों और व्यवहार का विश्लेषण करता है।
शिक्षा के संदर्भ में अंतर्दर्शन तीन स्तरों पर आवश्यक है-
- विद्यार्थी स्तर
- शिक्षक स्तर
- संस्थागत स्तर
यदि इन तीनों स्तरों पर आत्ममूल्यांकन की प्रक्रिया सक्रिय नहीं है तो शिक्षा का ढांचा खोखला हो जाता है।
2 शिक्षा व्यवस्था में अंतर्दर्शन का अभाव क्यों बढ़ रहा है?
1 परीक्षा-केंद्रित संस्कृति
आज शिक्षा परिणाम और रैंकिंग पर आधारित हो चुकी है। स्कूलों की प्रतिष्ठा बोर्ड परिणामों से तय होती है। ऐसे में नैतिक और भावनात्मक विकास पीछे छूट जाता है।
2 प्रतिस्पर्धा का अत्यधिक दबाव
विद्यार्थी निरंतर तुलना में जी रहे हैं। तुलना आत्मचिंतन को कमजोर करती है और हीनभावना को बढ़ाती है।
3 समय का अभाव
भारी पाठ्यक्रम और कोचिंग संस्कृति ने आत्मविश्लेषण के लिए समय ही नहीं छोड़ा।
4 शिक्षक प्रशिक्षण में सीमाएँ
शिक्षक प्रशिक्षण में तकनीकी दक्षता पर जोर है लेकिन भावनात्मक बुद्धिमत्ता और आत्मसमीक्षा पर कम ध्यान है।
3 विद्यार्थियों पर प्रभाव
1 रचनात्मकता में गिरावट
जब आत्मचिंतन नहीं होता तो विद्यार्थी मौलिक सोच विकसित नहीं कर पाते।
2 मानसिक तनाव और अवसाद
स्वयं को समझने की क्षमता कमजोर होने से विद्यार्थी अपनी असफलताओं को स्वीकार नहीं कर पाते।
3 नैतिक मूल्यों का ह्रास
अंतर्दृष्टि के बिना सही-गलत का विवेक विकसित नहीं होता।
4 आत्मविश्वास की कमी
विद्यार्थी अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान नहीं पाते।
4 शिक्षक पर प्रभाव
शिक्षक यदि आत्मविश्लेषण नहीं करते तो-
- वे अपनी शिक्षण शैली का मूल्यांकन नहीं कर पाते
- विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को नहीं समझ पाते
- कक्षा संवाद एकतरफा हो जाता है
एक अंतर्दर्शी शिक्षक कक्षा को जीवंत बनाता है।
5 संस्थागत स्तर पर प्रभाव
1 शिक्षा का व्यवसायीकरण
विद्यालय ब्रांड बनते जा रहे हैं।
2 अनुशासन समस्याएँ
जब मूल्य आधारित शिक्षा कमजोर होती है तो अनुशासनात्मक चुनौतियाँ बढ़ती हैं।
3 नवाचार की कमी
आत्ममूल्यांकन के अभाव में सुधार की प्रक्रिया ठहर जाती है।
6 समाज पर प्रभाव
शिक्षा समाज का आधार है।
यदि शिक्षा में अंतर्दर्शन नहीं होगा तो-
- भ्रष्टाचार बढ़ेगा
- सामाजिक संवेदनशीलता घटेगी
- जिम्मेदारी की भावना कमजोर होगी
7 शिक्षा में अंतर्दर्शन कैसे लाएँ?
1 दैनिक चिंतन गतिविधियाँ
- रिफ्लेक्शन डायरी
- कक्षा चर्चा
- आत्ममूल्यांकन फॉर्म
2 शिक्षक विकास कार्यक्रम
- भावनात्मक बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण
- माइंडफुलनेस अभ्यास
3 परियोजना आधारित शिक्षा
अनुभव आधारित शिक्षण आत्मचिंतन को बढ़ाता है।
4 मूल्य आधारित पाठ्यक्रम
नैतिक शिक्षा को व्यवहार से जोड़ा जाए।
5 संस्थागत आत्मसमीक्षा
विद्यालयों को वार्षिक आत्ममूल्यांकन रिपोर्ट बनानी चाहिए।
8 नई शिक्षा नीति और अंतर्दर्शन
नई शिक्षा नीति में समग्र विकास पर जोर दिया गया है।
यदि इसे सही रूप से लागू किया जाए तो आत्मविश्लेषण आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिल सकता है।
9 एक उदाहरण
मान लीजिए दो विद्यार्थी हैं-
पहला केवल अंक के लिए पढ़ता है।
दूसरा पढ़ाई के बाद स्वयं से पूछता है-
मैंने क्या सीखा? इसे जीवन में कैसे उपयोग करूँ?
दूसरा विद्यार्थी दीर्घकाल में अधिक सफल और संतुलित बनता है।
10 निष्कर्ष
शिक्षा व्यवस्था में अंतर्दर्शन का अभाव केवल शैक्षिक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक समस्या है।
यदि हम शिक्षा में आत्मचिंतन को स्थान नहीं देंगे तो हम केवल डिग्रीधारी नागरिक तैयार करेंगे जिम्मेदार नागरिक नहीं।
शिक्षा का उद्देश्य है-
ज्ञान, संवेदना और चरित्र का संतुलित विकास।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 शिक्षा में अंतर्दर्शन का क्या महत्व है?
उत्तर- यह विद्यार्थियों को आत्मज्ञान और संतुलित व्यक्तित्व प्रदान करता है।
2 अंतर्दर्शन की कमी से क्या समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
उत्तर- तनाव, नैतिक भ्रम और रचनात्मकता में कमी।
3 शिक्षक अंतर्दर्शन कैसे विकसित करें?
उत्तर- नियमित आत्ममूल्यांकन और प्रशिक्षण से।
4 क्या अंतर्दर्शन परीक्षा परिणाम सुधार सकता है?
उत्तर- हाँ क्योंकि यह समझ आधारित अध्ययन को बढ़ावा देता है।
5 क्या नई शिक्षा नीति में अंतर्दर्शन का स्थान है?
उत्तर- हाँ समग्र विकास के माध्यम से।

0 टिप्पणियाँ