ध्यान से पहले अंतर्दर्शन क्यों आवश्यक है?
भूमिका
आज के समय में ध्यान एक फैशन-सा शब्द बन गया है। हर कोई शांति, एकाग्रता और तनाव-मुक्त जीवन चाहता है। लोग ऐप डाउनलोड करते हैं पाँच-दस मिनट आँखें बंद करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जीवन अपने आप बदल जाएगा। परंतु बहुत-से लोगों की शिकायत होती है-
ध्यान करते समय विचार बहुत आते हैं
मन भटकता रहता है
शांति महसूस नहीं होती
इसका मूल कारण यह है कि ध्यान से पहले अंतर्दर्शन नहीं किया गया।
अंतर्दर्शन वह सेतु है जो बाहरी जीवन से भीतरी यात्रा तक ले जाता है। बिना अंतर्दर्शन के किया गया ध्यान अक्सर केवल एक तकनीक बनकर रह जाता है अनुभव नहीं।
यह लेख इसी प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास है-
ध्यान से पहले अंतर्दर्शन क्यों आवश्यक है?
अंतर्दर्शन ध्यान को कैसे गहरा करता है?
अंतर्दर्शन के बिना ध्यान अधूरा क्यों है?
अंतर्दर्शन क्या है?
अंतर्दर्शन का शाब्दिक अर्थ है-
अपने भीतर झाँकना
यह स्वयं से ईमानदार संवाद है।
यह प्रश्न पूछने की प्रक्रिया है-
- मैं कौन हूँ?
- मैं ऐसा क्यों सोचता हूँ?
- मेरे भय, इच्छाएँ और क्रोध कहाँ से आते हैं?
- मेरी पीड़ा की जड़ क्या है?
अंतर्दर्शन में हम स्वयं को जज नहीं करते बल्कि समझने का प्रयास करते हैं।
ध्यान क्या है?
ध्यान कोई पलायन नहीं है।
ध्यान का अर्थ है-
वर्तमान क्षण में पूर्ण सजगता के साथ ठहरना
ध्यान मन को दबाने की नहीं मन को देखने की कला है।
लेकिन मन को देखने से पहले उसे समझना आवश्यक है यहीं अंतर्दर्शन
की भूमिका शुरू होती है।
ध्यान और अंतर्दर्शन का मूल अंतर
| विषय | अंतर्दर्शन | ध्यान |
|---|---|---|
| प्रक्रिया | प्रश्न पूछना | मौन में देखना |
| भूमिका | तैयारी | अनुभव |
| दृष्टि | विश्लेषण | साक्षी भाव |
| समय | सक्रिय | निष्क्रिय जागरूकता |
अंतर्दर्शन बीज है ध्यान उसका फल।
ध्यान से पहले अंतर्दर्शन क्यों आवश्यक है?
1 बिना अंतर्दर्शन के ध्यान भ्रम पैदा कर सकता है
जब मन में दबे हुए भय, अपराध-बोध, क्रोध और अधूरी इच्छाएँ होती हैं-
और हम सीधे ध्यान में बैठते हैं-
तो वही दबा हुआ कचरा सतह पर आने लगता है।
लोग सोचते हैं-
ध्यान मेरे लिए नहीं है
असल में समस्या ध्यान में नहीं अंतर्दर्शन के अभाव में है।
2 अंतर्दर्शन मन की परतें खोलता है
मन एक परत नहीं है-
- चेतन मन
- अवचेतन मन
- संस्कार
- स्मृतियाँ
- दबी भावनाएँ
अंतर्दर्शन इन परतों को धीरे-धीरे उजागर करता है।
ध्यान तभी गहरा होता है जब यह परतें पहचानी जा चुकी हों।
3 अंतर्दर्शन आत्म-ईमानदारी सिखाता है
ध्यान में बैठते समय अगर आप स्वयं से झूठ बोल रहे हैं-
तो ध्यान केवल दिखावा बन जाता है।
अंतर्दर्शन हमें सिखाता है-
- अपनी कमजोरियाँ स्वीकार करना
- अपनी छाया को देखना
- स्वयं से भागना नहीं
4 अंतर्दर्शन उद्देश्य स्पष्ट करता है
आप ध्यान क्यों कर रहे हैं?
- तनाव कम करने के लिए?
- आत्म-ज्ञान के लिए?
- जीवन का अर्थ समझने के लिए?
बिना उद्देश्य के ध्यान दिशाहीन होता है।
अंतर्दर्शन ध्यान को दिशा देता है।
अंतर्दर्शन के बिना ध्यान करने के दुष्परिणाम
- मानसिक उलझन
- भावनात्मक अस्थिरता
- आध्यात्मिक अहंकार
- ध्यान से निराशा
- आत्म-भ्रम
अंतर्दर्शन कैसे करें?
1 प्रश्नों की डायरी लिखें
हर दिन स्वयं से पूछें-
- आज मुझे सबसे अधिक किस बात ने विचलित किया?
- मैं किससे डर रहा हूँ?
- मैं किससे भाग रहा हूँ?
2 भावनाओं को नाम दें
भावनाएँ दबाएँ नहीं-
उन्हें पहचानें-
क्रोध, ईर्ष्या, दुःख, अपराध-बोध।
3 प्रतिक्रियाओं को देखें
आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं-
यही आपका वास्तविक मन है।
4 दोषारोपण छोड़ें
अंतर्दर्शन का अर्थ है-
मेरे भीतर क्या है?
न कि
दूसरे गलत क्यों हैं?
अंतर्दर्शन के बाद ध्यान कैसे बदलता है?
जब अंतर्दर्शन हो चुका होता है-
- ध्यान सहज हो जाता है
- विचार कम परेशान करते हैं
- मौन डरावना नहीं लगता
- साक्षी भाव विकसित होता है
ध्यान संघर्ष नहीं स्वाभाविक अवस्था बन जाता है।
भारतीय दर्शन में अंतर्दर्शन और ध्यान
उपनिषद
आत्मानं विद्धि- स्वयं को जानो
भगवद्गीता
आत्मसंयम और आत्मनिरीक्षण को योग का आधार बताया गया है।
बुद्ध दर्शन
विपश्यना = गहन अंतर्दर्शन + सजग ध्यान।
अंतर्दर्शन + ध्यान = आंतरिक क्रांति
जब अंतर्दर्शन और ध्यान साथ आते हैं-
- जीवन की गति बदलती है
- निर्णय स्पष्ट होते हैं
- भय कम होते हैं
- आत्म-स्वीकृति बढ़ती है
निष्कर्ष
ध्यान कोई जादुई गोली नहीं है।
यह एक गहरी आंतरिक यात्रा है।
और हर यात्रा से पहले-
अंतर्दर्शन के बिना ध्यान अंधी उड़ान है।
अंतर्दर्शन के साथ ध्यान आत्म-प्रकाश है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 क्या बिना अंतर्दर्शन के ध्यान किया जा सकता है?
हाँ, लेकिन वह सतही रहेगा और लंबे समय तक लाभकारी नहीं होगा।
2 अंतर्दर्शन और आत्म-आलोचना में क्या अंतर है?
अंतर्दर्शन समझने की प्रक्रिया है, आत्म-आलोचना दोष खोजने की।
3 कितने समय अंतर्दर्शन करना चाहिए?
यह निरंतर प्रक्रिया है, कोई निश्चित समय सीमा नहीं।
4 क्या अंतर्दर्शन से डर या चिंता बढ़ सकती है?
शुरुआत में हाँ, पर बाद में स्पष्टता और शांति मिलती है।

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