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जीवन कौशल

लेखक- बद्री लाल गुर्जर
प्रस्तावना-

मनुष्य केवल ज्ञान से नहीं बल्कि अनुभव समझ और व्यवहार से आगे बढ़ता है। किताबें हमें जानकारी देती हैं लेकिन जीवन की असली सीख तो अनुभवों से मिलती है। यही असली सीख होती है जीवन कौशल। जीवन कौशल वे क्षमताएँ हैं जो व्यक्ति को सोचने समझने चुनौतियों से निपटने और संतुलित निर्णय लेने में समर्थ बनाती हैं। आज के समय में यह विषय और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि जीवन तेज़ी से बदल रहा है। तनाव बढ़ रहा है प्रतिस्पर्धा गहरी हो रही है और परिस्थितियों की अनिश्चितता बढ़ गई है। ऐसे में केवल स्कूल की पढ़ाई या डिग्री सफलता की गारंटी नहीं दे सकती। सफलता तभी संभव है जब व्यक्ति के पास जीवन कौशल हों जो उसे मजबूत, संवेदनशील समझदार और व्यवहारिक बनाएँ।

शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता तथा उसके व्यक्तित्त्व का विकास करने वाली प्रक्रिया है जो मनुष्य को सीखने सिखाने की कला के साथ ही एक सुसभ्य व चरित्रवान नागरिकों का निर्माण करती है यही प्रक्रिया उसे एक जिम्मेदार व सामाजिक नागरिक बनकर जीवन जीने की कला सिखाती है। 

1 जीवन कौशल का अर्थ-

जीवन कौशल वे क्षमताएँ हैं जिनसे व्यक्ति जीवन की दैनिक चुनौतियों का सामना सकारात्मक रचनात्मक और जिम्मेदार तरीके से करता है। सरल शब्दों में कहा जाए तो जीवन कौशल वह कला है जिससे हम जीवन को बेहतर ढंग से समझते हैं और अपने निर्णयों व्यवहार और भावनाओं को संतुलित रखते हैं।

2 जीवन कौशल क्यों जरूरी हैं? जीवन कौशल इसलिए जरूरी हैं क्योंकि वे हमें सक्षम बनाते हैं- 1 समस्याओं को समझने और हल करने में 2 सही निर्णय लेने में 3 रिश्तों को संभालने में 4 तनाव और दबाव से बाहर आने में 5 आत्मविश्वास बढ़ाने में 6 लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने में 7 बदलते समय के अनुसार खुद को ढालने में


हमारे देश में प्राचीन काल से ही शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है जिसके द्वारा वेद उपनिषद पुराण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में विभिन्न विद्यालयों विश्वविद्यालयों और गुरुकुलों के माध्यम से विद्यार्थियों को धार्मिक आध्यात्मिक और सामाजिक शिक्षा प्रदान की जाती थी।

वेदिक काल में गुरुकुल शिक्षा के मुख्य स्रोत थे जिनके माध्यम से छात्र गुरु के आश्रमों में जाकर उनसे विभिन्न विषयों में  शिक्षा प्राप्त करके अपने भावी जीवन का निर्माण करते थे।

ब्रिटिश शासन काल में विदेशी शिक्षा प्रणाली को भारत में लागू किया गया जिससे शिक्षा का प्राचीन परंपरागत स्वरूप ही बदल गया। इसके बाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शिक्षा को समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण का एक महत्वपूर्ण साधन माना गया और स्वतंत्रता के बाद भारत ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी नीतियों को स्थापित किया।

वर्तमान शिक्षा नीति में जीवन कौशल शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है जिसके माध्यम से हम छात्रों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ सुसभ्य नागरिकों का निर्माण कर सकते हैं -

जीवन कौशल शब्द का आजकल व्यापक प्रयोग हो रहा है लेकिन इसका अक्सर प्रयोग आजीविका कौशलों के साथ किया जाता है जबकि दोनों एक दूसरे से भिन्न हैं। आजीविका कौशल का अर्थ मनुष्य के द्वारा अपने व अपने परिवार के भरण पोषण के लिए धन अर्जित करना है जबकि जीवन कौशल में मनुष्य के आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक आयाम सम्मिलित होते हैं।जिससे मनुष्य के विकास में सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवेश का महत्वपूर्ण योगदान रहता है तथा जीवन कौशल शिक्षा  भारतीय समाज को अधिक विश्वसनीय, समर्थक और समानतापूर्ण बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

जीवन कौशल लोगों को निर्णय लेने विचारों का प्रभावी ढंग से आदान-प्रदान करने एवं आत्म प्रबंधन कौशलों को विकसित करने में उनकी सहायता कर सकता है जिससे लोग स्वस्थ एवं लाभप्रद जीवन जी सकते हैं।विद्यार्थियों अध्यापकों और समुदाय के सदस्यों को जीवन कौशल शिक्षा देना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जीवन का स्तर बेहतर बनता है।

जीवन कौशल मनुष्य को शारीरिक मानसिक और सामाजिक खुशहाली की पूर्ण अवस्था प्राप्त करने के विभिन्न विकल्पों को ढूंढ़ने में सहायक होती है। इसलिए जीवन कौशल शिक्षा सिर्फ सूचना का आदान-प्रदान करना ही नहीं है बल्कि इससे कौशल विकास भी होता है जो मनुष्य को सफल आदमी के रूप में जीवन जीने और परिवार समुदाय एवं कार्यबल जैसी अलग-अलग भूमिकाओं को कुशलता से निभाने में उसकी सहायता करता है। जीवन कौशल स्वस्थ एवं सामाजिक रूप से स्वीकृत किशारों को प्रोत्साहन देते हैं ।किशोरों को बाल्यवस्था से वयस्क नागरिक बनने में जीवन कौशल उनकी सहायता करते हैं जिससे सुसभ्य व चरित्रवान नागरिकों का निर्माण होता है।

जीवन कौशल से किशोरों को सामाजिक क्षमता एवं समस्या निवारण कौशलों से अपनी निजी पहचान बनाने में सहायता मिलती है।जीवन कौशल से मनुष्य को सही और गलत की पहचान करने की समझ विकसित होती है जिससे समस्या उत्पन्न करने वाले व्यवहार को रोकने में सहायता मिलती है। जीवन कौशल से सकारात्मक सामाजिक मानदंडों को बढ़ावा मिलता है जिसका असर किशोर की स्वास्थ्य सेवाओं विद्यालयों परिवार एवं समाज पर पड़ सकता है।

जीवन कौशल से सकारात्मक स्वाभिमान के विकास को बढ़ावा मिलता है और इससे मनुष्य क्रोध को नियंत्रित करना सीखता है।

21वीं सदी में जीवन कौशल की आवश्यकता- आज दुनिया डिजिटल हो चुकी है। तकनीक इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ हमारा जीवन बदल गया है। लेकिन इन बदलावों के साथ नए तनाव नई चुनौतियाँ और नए अवसर भी आए हैं। 21वीं सदी में जीवन कौशल इसलिए जरूरी हैं- - डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए- फेक न्यूज़ साइबर बुलिंग ऑनलाइन धोखाधड़ी प्राइवेसी खतरे आदि से बचने के लिए आलोचनात्मक सोच और निर्णय क्षमता जरूरी है। - प्रतियोगिता वाले माहौल में आगे बढ़ने के लिए- नौकरी परीक्षा और करियर में अब केवल विषय ज्ञान काफी नहीं है। संचार कौशल रचनात्मकता और टीमवर्क भी जरूरी हैं। - भावनात्मक संतुलन के लिए- तनाव अवसाद दबाव सामाजिक तुलना से निकलने के लिए जीवन कौशल आवश्यक हैं। - रोजगार और करियर विकास के लिए- कंपनियाँ और संगठन अब Life Skills को सबसे अधिक महत्व देते हैं।

जीवन कौशल कैसे विकसित करें? अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल- क्या जीवन कौशल जन्म से मिलते हैं या सीखे जा सकते हैं? उत्तर है- जीवन कौशल पूरी तरह सीखे जा सकते हैं। 1 अनुभव से सीखना- हर अनुभव एक सबक होता है। गलतियाँ भी सीख देती हैं और सफलताएँ आत्मविश्वास बढ़ाती हैं। 2 पढ़ना और ज्ञान बढ़ाना- किताबें लेख जीवनी मनोविज्ञान और जीवन दर्शन के ग्रंथ जीवन कौशल को मजबूत करते हैं। 3 आत्म-जागरूकता का अभ्यास- अपनी भावनाओं आदतों व्यवहारों और प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देना जीवन कौशल विकसित करता है। 4 ध्यान और योग- ध्यान और योग भावनाओं को संतुलित करते हैं और मानसिक स्पष्टता बढ़ाते हैं। 5 लक्ष्य निर्धारित करना- लक्ष्य तय करने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और उसका जीवन स्पष्ट दिशा में चलता है। 6 समय प्रबंधन सीखना- जो समय को संभालता है वह जीवन को संभाल लेता है। 7 सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताना- किसके साथ समय बिताते हैं इससे व्यवहार और सोच दोनों बनते हैं।

छात्रों के लिए जीवन कौशल-

छात्र जीवन में जीवन कौशल सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। ये कौशल उन्हें पढ़ाई, व्यवहार, करियर और रिश्तों में मजबूत बनाते हैं। छात्रों के लिए आवश्यक कौशल- - समय प्रबंधन। - लक्ष्य निर्धारण। - अनुशासन। - सकारात्मक आत्म-वार्ता। - तनाव प्रबंधन। - सामाजिक कौशल। - टीमवर्क। - अध्ययन कौशल। - ध्यान और एकाग्रता।

जीवन कौशल का महत्व परिवार में- 1 परिवार में जीवन कौशल संबंधों को स्वस्थ और मजबूत बनाते हैं। 2 जीवन कौशल वाला व्यक्ति-

- संवाद बेहतर करता है। - रिश्तों को समझता है। - धैर्यपूर्वक व्यवहार करता है। - विवादों को शांतिपूर्वक सुलझाता है।

अतः जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित किया जाता है तो निश्चित रूप से इससे किशोरों को अपने जीवन के सर्वाधिक कठिन पक्ष का सामना करने में सहायता मिलेगी। जीवन कौशल हर व्यक्ति के विकास की नींव हैं। ये कौशल हमारे विचार भावनाओं व्यवहार और जीवन शैली को सकारात्मक बनाते हैं। जो व्यक्ति जीवन कौशल को अपनाता है वह हर चुनौती को अवसर में बदलता है और जीवन में सफलता की नई ऊँचाइयों को छूता है।

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